anant tv

 डॉ. द्विवेदी ने उक्त अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में “भारतीय डायसपोरा के आर्थिक मुद्दों” पर चर्चा की

वर्धा (महाराष्ट्र) स्थित महात्मा  गांधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय ( केंद्रीय विश्वविद्यालय) में आयोजित रहा तीन दिवसीय  अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी।

 
ADAD

डॉ. पुनीत द्विवेदी मॉडर्न ग्रुप ऑफ़ इंस्टीट्यूशन्स इंदौर में  प्रोफ़ेसर  एवं समूह निदेशक  की भूमिका में कार्यरत हैं।

अपने वक्तव्य में डॉ. पुनीत द्विवेदी ने सिलीकॉन वैली के अप्रवासी भारतीयों से स्टार्टअप्स एवं नवाचार सीखने की बात की एवं शोधकर्ताओं से वर्तमान परिप्रेक्ष्य के अनुरूप स्वयं को एवं अपने शोध को नवाचार स परिपूर्ण करने की बात की।  डॉ. पुनीत ने कहा कि  भारतीय मूल के अप्रवासी भारतीयों को अपने मूल अर्थात् भारत की सभ्यता एवं संस्कृति पर सदा से अभिमान रहा है। इसी अभिमान के चलते वे अपने मूल को जानने भारत आते रहते हैं। भारत की सुविधाओं से नहीं बल्कि उन्हें अपने देश और देश की संस्कृति से प्रेम है। अतः हमारा सर्वकार भी भारतीय मानस के अनुरूप होना चाहिये। वर्तमान सरकार की अप्रवासी भारतीयों को लेकर जो दृष्टि है उससे भारत का अप्रवासी वर्ग और अधिक सुदृढ़ होगा। शिक्षण संस्थान अपने अलूमनी बेस का ठीक से उपयोग कर अपने उन विद्यार्थियों को ढूँढ सकते हैं जो अब अप्रवासी बन गये हैं एवं उनसे सहयोग से वर्तमान विद्यार्थियों में कौशल विकास, उद्यमिता अथवा रोज़गार के नये अवसरों को एक नये अवसर के रूप में मूर्त रूप दे सकते हैं।मेंटरशिप की भूमिका में उन्हें रखना श्रेयस्कर रहेगा।” उक्त अंतरराष्ट्रीय  संगोष्ठी में इंदौर के  डॉ. पुनीत द्विवेदी के संग मंच पर अन्य गणमान्य अतिथियों बी.एच.यू  (काशी हिंदू विश्वविद्यालय) के पूर्व-कुलपति एवं वर्तमान अध्यक्ष उच्च शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश ख्यातिलब्ध अर्थशास्त्री प्रो० गिरीशचंद्र त्रिपाठी जी, बी.एच.यू  वाणिज्य विभागाध्यक्ष प्रो० आशाराम त्रिपाठी जी, उद्यमी (अप्रवासी) श्री मनीष गुप्ता जी उपस्थित रहे। देश-विदेश के अनेकों शोधार्थियों ने अपने शोधपत्र प्रस्तुत किये। अंतरराष्ट्रीय सेमिनरी की समन्वयक डॉ. रोमसा शुक्ला ने आभार व्यक्त किया। महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो० रजनीश कुमार शुक्ल जी की गरिमामय उपस्थिति रही। शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार के आई.सी.पी.आर और आई.सी.एच.आर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित थी यह अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी।

From around the web