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पिछले तीन दिन से सचिन पायलट भी सभाओं में पेपर लीक को लेकर सरकार पर हमलावर हैं। 

 
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गहलोत ने कर्मचारी नेताओं से कहा, चार साल में जो बर्बादी हुई है हमारी खुद की, जिस प्रकार से दिन खराब हुए हैं। मिलना नहीं, जुलना नहीं। कभी कोरोना से टाइम नहीं मिला। फिर मुझे तीन बार कोरोना हो गया। पोस्ट कोविड से फिर हार्ट का स्टेंट लग गया। मैं आप लोगों की शिकायत से सहमति रखता हूं। अब मैं मिलने लगा हूं। सोमवार को मिलता हूं और अगर जरूरी काम से बाहर चला गया तो आपको मिलने का समय बता दूंगा। पिछले तीन दिन से सचिन पायलट भी सभाओं में पेपर लीक को लेकर सरकार पर हमलावर हैं। पायलट ने बुधवार को झुंझुनूं के गुढ़ा में पेपर लीक में अफसर नेताओं को CM की क्लीन चिट पर सवाल उठाए थे।

वहीं, पायलट ने कहा था, जब कोई नेता अफसर जिम्मेदार नहीं है तो तिजोरी से पेपर बाहर कैसे आ गया, यह तो जादूगरी हो गई, कोई तो जिम्मेदार होगा? इस बयान के कुछ देर बाद ही CM की प्री बजट बैठक थी। इसमें गहलोत ने कर्मचारियों के सामने पार्टी के कोरोना का जिक्र कर दिया। कांग्रेस में अब पायलट गहलोत के बीच विवाद और तेज होने के आसार बन गए हैं। CM अशोक गहलोत और सचिन पायलट खेमों के बीच राहुल गांधी की यात्रा के समय हुआ सीजफायर टूट गया है और अब फिर से सियासी कोल्ड वॉर की शुरुआत हो गई है। सचिन पायलट की सभाओं से इसकी शुरुआत हो गई है। दोनों नेता अब एक-दूसरे पर पलटवार करने लगे हैं। सियासी लड़ाई में अब नए नए शब्द भी आने लगे हैं। राहुल गांधी की यात्रा से पहले गहलोत ने पायलट को गद्दार बताया था। अब ताजा पलटवार पर पायलट के रिस्पॉन्स का इंतजार है।

संविदा कर्मचारियों के नेता शमशेर भालू ने CM से कहा, संविदा कर्मचारियों की मांगें कभी नहीं सुनी गई। एक शेर है, सुना है कल दरबार में अशर्फियां बंटीं थीं, अफसोस कि मैं दरवाजे पर एक रोटी के लिए खड़ा रहा। वहीं, शमशेर ने कहा कि संविदाकर्मियों की मांगों के लिए हमने दांडी यात्रा की, धरने दिए, लेकिन अफसोस हमें कुछ हासिल नहीं हुआ। संविदाकर्मियों को कॉन्ट्रैक्चुअल सर्विस रूल लेने में भी गड़बड़ है। नियमित की जगह फिर संविदा पर रख दिया और उसमें भी पिछले काम का अनुभव नहीं जोड़ा। पुराने अनुभव को नहीं जोड़ना संविदाकर्मियों के पेट पर लात मारने जैसा है।

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