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 वात, पित्त और कफ के अनुसार अपनी प्रकृत्ति को पहचान कर आहार करें तो हम बहुत सारी बिमारियों से बच सकते है। 

 
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मुम्बई के जाने-माने हेल्थ कौसिलर डॉ. दिलीप नलगे ने कहा कि सर्वांगीण स्वास्थ्य के लिए सही जीवनशैली का ज्ञान होना जरूरी है। वर्तमान भागदौड़ की जिन्दगी में उचित आहार, विचार, व्यवहार, निद्रा और व्यायाम का जीवन में अभाव सा हो गया है। परिणाम स्वरूप अव्यस्थित जीवनशैली के कारण लोग अनेकानेक घातक बिमारियों का शिकार होते जा रहे हैं।

डॉ. नलगे प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा विधानसभा रोड पर स्थित शान्ति सरोवर में आयोजित तीन दिवसीय कार्यक्रम राजयोग द्वारा सम्पूर्ण स्वास्थ्य के उद्घाटन सत्र में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि वात, पित्त और कफ के अनुसार अपनी प्रकृत्ति को पहचान कर आहार करें तो हम बहुत सारी बिमारियों से बच सकते है। लेकिन इसके लिए यह जानना होगा कि कब खाना है, क्या खाना है और कैसे खाना है। यह हरेक व्यक्ति के लिए मौसम और प्रकृत्ति के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। इसकी जानकारी वह कल के सत्र में बतलाएंगे। डॉ. नलगे ने कहा कि स्वस्थ रहने के लिए पाँच बातों का जीवन में समावेश करना आवश्यक है- उचित आहार, मधुर व्यवहार, शारीरिक व्यायाम, राजयोग मेडिटेशन और सही जीवनशैली। आयुर्वेद का कहना है कि सही आहार लेने से दवाई की जरूरत नहीं होती है। इसी तरह अगर सही आहार नहीं लेते हैं तो दवाई भी कुछ नहीं कर सकती है। हमारा आहार सबसे बड़ी औषधि है। जो व्यक्ति गुस्सा नहीं करता है, अल्कोहल नहीं लेता है, सबसे मधुर व्यवहार करता है, उसका स्वास्थ्य हमेशा अच्छा बना रहता है। यह सभी बातें औषधि की तरह हमें स्वस्थ बनाने में मदद करती हैं।

उन्होंने बताया कि सामाजिक स्वास्थ्य के अभाव में भारत में डायबिटिजके रोगी इतनी तेजी से बढ़ रहे हैं कि हमारा देश आजकल डायबिटिज की राजधानी माना जाने लगा है। अनुसंधान से पता चला है कि इसका प्रमुख कारण सम्बन्धों में कटुता अथवा तनाव होना है। यदि हम सभी के प्रति अच्छा व्यवहार और सहयोग की भावना रखें तो इस बिमारी से बचा जा सकता है।

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