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संयुक्त राष्ट्र महासभा के इस सत्र में दुनियाभर के नेताओं ने हिस्सा लिया। पीएम मोदी की सराहना की 

 
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन के दौरान एक द्विपक्षीय वार्ता के दौरान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को शांति का पाठ पढ़ाया था। कई पश्चिमी देशों ने इसके लिए पीएम मोदी की सराहना की है। इस मुद्दे पर सबसे पहले अमेरिका का बयान सामने आया था। वहां की मीडिया में भी प्रधानमंत्री ने खूब सुर्खियां बटोरीं। अब संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में भी बड़े देशों के नेता भारत और पीएम मोदी की सराहना कर रहे हैं। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के अलावा अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के प्रतिनिधि ने भी प्रशंसा की है। आपको बता दें कि संयुक्त राष्ट्र महासभा के इस सत्र में दुनियाभर के नेताओं ने हिस्सा लिया।

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के एक सत्र में कहा कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से कहा था कि यह युद्ध का वक्त नहीं है और उनकी यह बात एकदम सही थी। मैक्रों ने अपने संबोधन में कहा, ''भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सही कहा था कि यह युद्ध का युग नहीं है। यह पश्चिम से बदला लेने और उसे पूर्व के खिलाफ खड़ा करने का समय नहीं है। यह वक्त है कि हम सभी संप्रभु राष्ट्र हमारे समक्ष मौजूद चुनौतियों का एकजुट होकर मुकाबला करें।'' उन्होंने कहा, ''इसीलिए उत्तर और दक्षिण के बीच नए समझौतों की सख्त जरूरत है। एक ऐसा समझौता, जो खाद्यान्न, शिक्षा और जैव विविधता के क्षेत्र में हो। यह सोच को सीमित करने का नहीं, बल्कि साझा हितों के लिए खास कार्रवाई करने के वास्ते गठबंधन बनाने का है।''

फ्रांस के बाद अमेरिका ने की मोदी की तारीफ
वहीं, अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने मंगलवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वह बयान सिद्धांतों के आधार पर दिया गया बयान था, जिसे वह सही मानते हैं। एससीओ शिखर सम्मेलन के मौके पर पीएम मोदी के बयान पर एक सवाल के जवाब में सुलिवन ने कहा, "मुझे लगता है कि प्रधानमंत्री मोदी ने जो कहा वह सही और न्यायपूर्ण है। उनकी ओर से सिद्धांतों के आधार पर दिया गया बयान है। इसका बहुत स्वागत किया गया।'' उन्होंने आगे कहा कि यह युद्ध समाप्त होना चाहिए। यह संयुक्त राष्ट्र चार्टर की मूल शर्तों का उल्लंघन है। यूक्रेन को उन क्षेत्रों को वापस करना चाहिए है जिन्हें रूस ने बलपूर्वक जब्त कर लिया था।

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