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राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष शोभा ओझा ने दिया इस्तीफा

 
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मध्यप्रदेश महिला आयोग की अध्यक्ष शोभा ओझा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। शुक्रवार को इंदौर में एक प्रेस वार्ता कर उन्होंने इसकी घोषणा की है। इस दौरान राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सवा दो साल से पद हैं, लेकिन अधिकार छीन लिए गए हैं। आफिस में ताले लगा दिए गए हैं, उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के निर्देशों की भी अवहेलना की गई है। शोभा ओझा ने कहा कि महिला आयोग के अधिकारी सहयोग नहीं करते हैं। जिसकी वहज से महिला आयोग में 17 हज़ार से ज्यादा केस पेंडिंग हैं। उन्होंने मीडिया को इस्तीफा की कॉपी जारी की है जिसे उन्होंने सीएम शिवराज सिंह को पत्र के रूप में भेजा है।

सीएम शिवराज सिंह चौहान को संबोधित पत्र में ओझा ने कहा है कि वे यह स्पष्ट कर देना चाहती हैं कि राज्य महिला आयोग की संवैधानिक रूप से गठित कार्यकारिणी को भंग करने का प्रयास कर, उसे न्यायालयीन प्रक्रियाओं में उलझा कर, भाजपा की सरकार ने हजारों महिलाओं को न्याय से वंचित करने का अन्यायपूर्ण व अक्षम्य कार्य किया है। राजनीतिक स्वार्थों की खातिर महिला सुरक्षा और उनके अधिकारों की बलि चढ़ाने का जो पाप आपकी सरकार ने किया है, वह पूरी तरह से अस्वीकार्य है।

उन्होंने कहा कि अधिनियम-1995 की धारा-3 के तहत मध्यप्रदेश राज्य महिला आयोग जो महिलाओं के शुभचिंतक, परामर्शदाता, मित्र, शिक्षक तथा श्रोता के रूप में कार्य करने के लिए एक संवैधानिक निकाय के रूप में गठित किया गया था, उसे अधिकार विहीन, शक्तिहीन और पंगु बनाने की आपकी सरकार की कोशिशें बेटी बचाओ और नारी सुरक्षा जैसे आपके ही नारों के खोखलेपन और वास्तविक मंशा को उजागर कर रहे हैं।

शोभा ओझा ने कहा कि इन परिस्थितियों में मैं महिला आयोग के एक ऐसे अशक्त मुखिया की भूमिका में हूं, जिसके सारे अधिकार छीन लिए गए हैं। मैं चाह कर भी महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों के लिए कुछ नहीं कर पा रही हूँ। लिहाजा मैं आयोग के अध्यक्ष पद की संवैधानिक बाध्यताओं को त्याग कर उन्मुक्त और खुले मन से पीडि़त, शोषित और दमित महिलाओं की व्यथा और वेदना को स्वर देने के अपने संघर्ष को अन्य मंचों से जारी रखने का संकल्प और पवित्र उद्देश्य लिए अपने पद से इस्तीफा देना चाहती हूं। कृपया इस पत्र को ही मेरा इस्तीफा समझें। हालांकि, ओझा ने इस्तीफे का जो समय चुना है उसे लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कांग्रेस में स्टार प्रचारकों की कमी है लिहाजा, कांग्रेस भी चाहती थी ओझा जल्द मैदानी स्तर पर कोई बड़ी जिम्मेदारी संभाले।

गौरतलब है कि कमलनाथ सरकार गिरने के पहले मार्च 2020 में मुख्यमंत्री रहते हुए कमलनाथ ने शोभा ओझा समते दूसरे कई नेताओं आयोग में नियुक्तियां की थी। लेकिन सरकार के तख्तापलट होने के बाद जब भाजपा सरकार बनीं तब इनकी नियुक्तियों को अवैध बताया गया था। उसके बाद शोभा ओझा समेत दूसरे कई नेता हाईकोर्ट गए थे जहां कोर्ट ने कांग्रेस नेताओं की आपत्ति पर अपनी सहमति जताते हुए सरकार को आदेश दिया था।

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