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विधानसभा में सोमवार को छत्तीसगढ़ विद्युत शुल्क संशोधन विधेयक पारित हो गया है

 
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विधानसभा में सोमवार को छत्तीसगढ़ विद्युत शुल्क संशोधन विधेयक पारित हो गया है। इससे अब प्रदेश में बिजली महंगी हो जाएगी। इसको लेकर सदन में विपक्ष ने जमकर हंगामा किया।

विपक्ष ने सरकार को घेरते हुए कहा कि विद्युत शुल्क में वृद्धि कर अपना जेब भरने की तैयारी कर रही है। यह आम जनता पर बोझ डालने जा रही है।

मुख्यमंत्री भूपेश ने कहा कि बिजली दरों को 10 साल बाद अनुपातीकरण किया जा रहा है। इससे पहले 2012 में अनुपातीकरण किया गया था, जब भाजपा की ही सरकार थी। इसकी राशि राज्य के संचित निधि में ही जाएगा। जो शुल्क लगाया गया है वो सेस या उपकर नहीं है।

चर्चा के दौरान भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने सरकार को घेरते हुए कहा कि विद्युत शुल्क में बढ़ोत्तरी कर सरकार अपनी जेब भरने जा रही है। इसके पहले गौठनों के सेस, कोरोना सेस शराब पर सेस लगाकर लूटा गया। अब विद्युत शुल्क बढ़ाकर लूटने की तैयारी कर रही है।

इस संसोधन विधेयक के पारित होने के साथ ही अब ऊर्जा प्रभार में बढ़ोतरी होगी। घरेलू उपभोक्ताओं पर ऊर्जा प्रभार में बढ़ोतरी की गई है। आठ प्रतिशत से बढ़ाकर 11 प्रतिशत किया गया। तीन प्रतिशत की बढ़ोत्तरी घरेलू उपभोक्ताओं के लिए की गई है। गैर घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 12 प्रतिशत से बढ़ाकर 17 प्रतिशत किया गया है। सीमेंट उद्योग में 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 21 प्रतिशत किया गया है। 25 हॉर्सपावर तक के एलटी उद्योगों के लिए तीन प्रतिशत से बढ़ाकर चार प्रतिशत किया गया है। वहीं मिनी स्टील प्लांट और फेरो एलॉयज इकाइयों के लिए 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 8 प्रतिशत किया गया है। आटा चक्की, आईल, थ्रेसर, एक्सपेलर के लिए तीन प्रतिशत से बढ़ाकर चार प्रतिशत किया गया है।

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