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प्रदेश सरकार ने सरकारी जमीनों पर कब्जा करने वालों के खिलाफ सख्त रवैया अपनाया है.

 
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सरकारी व निजी संपत्तियों पर कब्जा कर भूमाफिया घोषित सात बिल्डरों की संपत्तियां खंगाली जा रही हैं. इसमें बहुत सी शत्रु संपत्ति भी हैं जिन पर कब्जे किए गए. मकान बनाकर उन्हें मोटे दामों में बेचा गया. इसमें मॉडल टाउन की जमीन का मामला भी शामिल होना बताया जा रहा है.

प्रदेश सरकार ने सरकारी जमीनों पर कब्जा करने वालों के खिलाफ सख्त रवैया अपनाया है. मुख्यमंत्री के आदेश के बाद प्रशासन की ओर से सीलिंग की जमीन पर कब्जा कर बेचने के मामले में एलायंस बिल्डर्स के डायरेक्टर रमनदीप, अमनदीप, हनी भाटिया समेत सात को भूमाफिया घोषित कर दिया है. अब बरेली के कई बड़े प्रोजेक्ट जांच के दायरे में आ गए हैं. कितनी जमीन काश्तकारों से खरीदी गई, कितनी का नक्शा पास कराया गया और कितनी जमीन पर निर्माण किया गया है, ऐसे तमाम सवालों के जवाब जांच में सामने आएंगे. नैनीताल रोड, पीलीभीत बाइपास और रामपुर रोड के कुछ आवासीय प्रोजेक्ट जांच के दायरे में बताए जा रहे हैं. माडल टाउन की जमीन का मामला भी खुलेगा.
कई भूमाफिया ने अलग अलग नाम से संपत्ति बनाई प्रशासन स्तर से घोषित भूमाफिया ने जमीन मामलों में बड़ा खेल खेला. उन्होंने शासन, प्रशासन की कार्रवाई से बचने को पहले ही कई रास्ते तलाश लिए थे. उन्होंने अकूत संपत्तियों पर कब्जे तो किए उन्हें अपने सहयोगी रिश्तेदार, बाहरी लोगों के नाम से साम्राज्य खड़ा किया. सिविल लाइंस की चर्चा लाल कोठी पर भी कब्जा कर उसको कौड़ियों के दाम में खरीदा. वहां आवासीय कॉलोनी बसाकर अरबों में बेच दिया.
भूमाफिया का दखल बाहरी तरफ से भी रहा. शहर में 41 ऐसी कालोनियां हैं जो सहकारी आवास समिति द्वारा बनाई गई हैं. बताया जा रहा है कि समिति के प्रमुख लोगों ने मनमानी कर भूमि को खुर्दबुर्द किया है. कालोनी में जहां पार्क थे, उस प्लॉट को भी बेच दिया है. वर्षों से चल रही इस मनमानी को जांचने के लिए हाईकोर्ट ने सहकारी आवास समिति का औचक आडिट करने का अचानक आदेश जारी कर दिया. पहले चरण में 10 समितियों का ऑडिट करने की बात हुई जिसमें नामी कालोनी मॉडल टाउन कालोनी, वीर सावरकर नगर कालोनी भी शामिल है. इन दो कालोनियों में पार्क की भूमि पर मकान बने हैं.

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