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ISS मिशन पूरा कर भारत लौटे शुभांशु शुक्ला, कहा- छोड़कर आने का रहा सबसे बड़ा दुख

नई दिल्ली 21वीं सदी में अंतरिक्ष यात्रा करके इतिहास बनाने वाले वायु सेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला अपना मिशन पूरा कर रविवार तड़के देश वापस लौट आए हैं। एक्सिओम-4 मिशन के तहत अंतर्राष्ट्रीय स्पेस स्टेशन पर पहुंचे शुक्ला पिछले 41 सालों में अंतरिक्ष पहुंचने वाले पहले भारतीय बने। नई दिल्ली एयरपोर्ट पर उनका स्वागत …
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नई दिल्ली 
21वीं सदी में अंतरिक्ष यात्रा करके इतिहास बनाने वाले वायु सेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला अपना मिशन पूरा कर रविवार तड़के देश वापस लौट आए हैं। एक्सिओम-4 मिशन के तहत अंतर्राष्ट्रीय स्पेस स्टेशन पर पहुंचे शुक्ला पिछले 41 सालों में अंतरिक्ष पहुंचने वाले पहले भारतीय बने। नई दिल्ली एयरपोर्ट पर उनका स्वागत करने के लिए दिल्ली की मुख्य मंत्री रेखा गुप्ता, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह समेत उनका पूरा परिवार और तमाम लोग मौजूद थे।

घर वापसी की इस यात्रा के लिए उड़ान भरने से पहले शुक्ला ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपने विचार साझा किए थे। उन्होंने लिखा, "भारत वापस आने के लिए विमान में बैठते ही मेरे दिल में कई तरह की भावनाएं उमड़ रही हैं। मुझे उन शानदार लोगों को पीछे छोड़कर आने का दुख है, जो पिछले एक साल से इस मिशन के दौरान मेरे दोस्त और परिवार रहे हैं। मैं मिशन के बाद पहली बार अपने सभी दोस्तों, परिवार और देश के सभी लोगों से मिलने के लिए भी उत्साहित हूं। मुझे लगता है कि यही जिंदगी है… सब कुछ एक साथ।"

उन्होंने आगे लिखा, “अलविदा कहना थोड़ा मुश्किल होता है लेकिन हमें जिंदगी में आगे बढ़ते रहना चाहिए जैसा कि मेरी कमांडर पैगी कहती हैं कि 'अंतरिक्ष उड़ान में एक मात्र स्थिर चीज परिवर्तन है।' मेरा मानना है कि यह बात जिंदगी पर भी लागू होती है। मुझे आखिरकार लगता है कि यूं ही चला चल राही… जीवन गाड़ी है और समय पहिया है।” आपको बता दें भारत के गगन यान मिशन के लिए अनुभव जुटाने के लिए शुभांशु शुक्ला मिशन के साथ अंतरिक्ष में गए थे। यहां पर 26 जून को वह स्पेस स्टेशन से जुड़े, जहां पर उन्होंने कई प्रयोग किए। इसरो के मुताबिक, शुक्ला ने अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन और अंतरिक्ष शटल पर कई प्रयोग किए, और उम्मीद है कि इनके निष्कर्षों से गगनयान परियोजना को सीधे तौर पर मदद मिलेगी।

यह कार्यक्रम इस साल के अंत में एक मानवरहित उड़ान के साथ शुरू होगा, जिसके बाद दो और मानवरहित मिशन होंगे। अंततः, एक भारतीय अंतरिक्ष यात्री गगनयान अंतरिक्ष यान पर सवार होकर अंतरिक्ष में 2-7 दिन बिताएगा।

 

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