शिक्षक दिवस - संत राजिन्दर सिंह जी महाराज
आज का दिन हम सब शिक्षक दिवस या टीचर्स डे के रूप में मना रहे हैं। इस दिन हम अपने अध्यापकों और गुरुओं का सम्मान करते हैं।
इस संसार में जब भी हमारे बच्चे यदि कोई विषय सीखना चाहते हैं तो वे एक ऐसे अध्यापक के पास जाते हैं जो उसमें निपुण हो। हम सभी यह अच्छी तरह जानते हैं कि एक अध्यापक की बच्चों के जीवन में बहुत महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है। उनके मार्गदर्शन में बच्चा न केवल पढ़ना-लिखना सीखता है बल्कि भविष्य में बढ़ा होकर उन्हें क्या बनना है? इसकी जानकारी भी उन्हें अध्यापक के द्वारा ही मिलती है।
इसी प्रकार यदि हम अपने आपको आध्यात्मिक रूप से विकसित करना चाहते हैं तो उसके लिए हमें वक्त के किसी पूर्ण गुरु के चरण-कमलों में जाना होगा क्योंकि एक पूर्ण सत्गुरु अध्यात्म के विषय में निपुण होते हैं। इस धरती पर हर समय कोई न कोई पूर्ण सत्गुरु अवष्य मौजूद होते हैं, जो हमें ध्यान-अभ्यास के द्वारा अपने अंतर में मौजूद प्रभु-सत्ता के साथ जुड़ने में हमारी मदद करते हैं।
जब हम उनके पास जाते हैं तभी हमें पता चलता है कि चौरासी लाख जियाजून में केवल मानव चोले में ही हम अपनी आत्मा का मिलाप पिता-परमेश्वर से करवा सकते हैं, जोकि मानव जीवन का मुख्य उद्देश्य है। वो हमें समझाते हैं कि पिता-परमेश्वर प्रेम के महासागर हैं, हमारी आत्मा उनका अंश होने के नाते प्रेम है और पिता-परमेश्वर को पाने का ज़रिया भी प्रेम ही है।
वे न केवल आंतरिक अनुभव को पाने की विधि के बारे में हमें समझाते हैं बल्कि व्यक्तिगत तौर पर उसका हमें अनुभव भी देते हैं। इसके लिए जब वे हमें दीक्षा अथवा नामदान देते हैं तो हमें ध्यान-अभ्यास की विधि सिखाते हैं। वे हमें बताते हैं कि हम अपने ध्यान को दो भ्रूमध्य आँखों के बीच ‘शिवनेत्र’ पर एकाग्र करें। जैसे-जैसे हम ध्यान-अभ्यास समय देते हैं तो हम अपने अंदर प्रभु की ज्योति और श्रुति का अनुभव करते हैं।
जिस प्रकार एक अध्यापक का कार्य बच्चों को शिक्षा के ज़रिये उनकी इच्छा के अनुसार दुनियावी मकसद तक पहुँचाना होता है। ठीक उसी प्रकार एक सत्गुरु भी प्रेम के ज़रिये पिता-परमेश्वर से जुदा हुई रूहों को उनके निजधाम सचखंड पहुँचा देते हैं।
तो आईये! आज के दिन हम न सिर्फ अपने अध्यापकों का सम्मान करें बल्कि हम अपने आध्यात्मिक गुरुओं के प्रति भी आभार प्रकट करें क्योंकि उनके द्वारा ही हम इस जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति पाकर पिता-परमेश्वर में लीन हो सकते हैं।

