बार्कलेज ने वित्त वर्ष 2022 के लिए घटाया जीडीपी ग्रोथ का अनु

बार्कलेज ने वित्त वर्ष 2022 के लिए घटाया जीडीपी ग्रोथ का अनुमान, स्थानीय लॉकडाउन को बताया जिम्मेदार

 
बार्कलेज ने वित्त वर्ष 2022 के लिए घटाया जीडीपी ग्रोथ का अनुमान, स्थानीय लॉकडाउन को बताया जिम्मेदार

नई दिल्ली । वैश्विक ब्रोकरेज फर्म बार्कलेज (Barclays) ने वित्त वर्ष 2022 के लिए भारत की जीडीपी ग्रोथ के अनुमान में कटौती की है। वैक्सीनेशन की धीमी रफ्तार और कोरोना वायरस की दूसरी लहर में संक्रमण दर व मरने वाले लोगों की तेजी से बढ़ती संख्या से उत्पन्न हुई अनिश्चितता के कारण बार्कलेज ने वित्त वर्ष 2022 के लिए भारत की जीडीपी ग्रोथ के अनुमान को पहले के 11 फीसद से घटाकर 10 फीसद कर दिया है। ब्रोकरेज फर्म ने कहा कि अगर मौजूदा स्थानीय लॉकडाउन जून तक चलता है, तो इससे 38.4 बिलियन डॉलर का आर्थिक नुकसान होगा। महामारी के अधिक निराशावादी परिदृश्य में अगर शीघ्र ही नियंत्रण नहीं पाया जा सका और आवाजाही पर अगस्त तक प्रतिबंध जारी रहे, तो ग्रोथ रेट गिरकर 8.8 फीसद तक आ सकती है।

देश की अर्थव्यवस्था के वित्त वर्ष 2021 में 7.6 फीसद की दर से संकुचित होने का अनुमान है, क्योंकि महामारी के चलते लगे देशव्यापी लॉकडाइन ने आर्थिक गतिविधियों को रोक दिया था और मांग व रोजगार पर काफी बुरा प्रभाव पड़ा था। निम्न आधार के चलते वित्त वर्ष 2022 में तेज ग्रोथ रेट होने का अनुमान था, लेकिन कोरोना वायरस महामारी की दूसरी लहर और इसके कारण लगे स्थानीय लॉकडाउन के कारण कई विश्लेषकों को अपने पूर्वानुमान को घटाना पड़ रहा है। भारतीय रिज़र्व बैंक ने कहा है कि इस वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था 10.5 फीसद की दर से वृद्धि करेगी। बार्कलेज के विश्लेषकों ने कहा, 'जिस प्रकार भारत में कोरोना महामारी की दूसरी लहर जारी है, उससे संक्रमण व मौतों की संख्या को लेकर अनिश्चितता बढ़ रही है। धीमा वैक्सीनेशन भी भारत की रिकवरी की संभावनाओं को प्रभावित कर रहा है। हम इस अनिश्चितता के चलते वित्त वर्ष 2021-22 के जीडीपी ग्रोथ अनुमान को एक फीसद कम कर 10 फीसद करते हैं।'


 

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