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 नेताजी की झांकी नहीं होगी तो गणतंत्र दिवस परेड बेमानी होगी। 

 
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सुभाष चंद्र बोस की जयंती को शामिल करने के लिए गणतंत्र दिवस समारोह अब 24 जनवरी के बजाय हर साल 23 जनवरी से शुरू होगा। हालांकि सरकार ने इस खबर की आधिकारिक घोषणा नहीं की है, मगर ऐसा बतायज रहा है कि यह खबर सत्य है।

इस बारे में आज ही निर्णय करने के पीछे सरकारी सूत्रों द्वारा कारण यह बताया जा रहा है कि आज आर्मी डे है, और भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन मूवमेंट में सुभाष चंद्र बोस के इंडियन नेशनल आर्मी (INA) के योगदान और कुर्बानी को देखते हुए आज का दिन चुना गया है। साथ ही यह भी कारण है कि इस साल नेताजी की 125वीं सालगिरह मनाया जा रहा है।

नेताजी के पोते चंद्र कुमार बोस ने इन खबर पर प्रतिक्रिया देते और आपत्ति जताते हुए कहा कि सुभाष चंद्र बोस का वास्तव में सम्मान करने के लिए उनकी विचारधारा को समझना चाहिए और उस पर अमल करना चाहिए। आज विभाजनकारी राजनीति देश को तोड़ रही है। नेताजी की झांकी नहीं होगी तो गणतंत्र दिवस परेड बेमानी होगी। 

ज्ञात हो कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को हुआ था। उन्होंने देश के स्वतंत्र में भाग लेने के लिए इंडियन सिविल सर्विसेज जैसे उच्च पद और उपाधि का परित्याग कर दिया था। अपने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान उन्होंने दो बार कांग्रेस पार्टी का अध्यक्ष का पदभार संभाला। अपनी अलग विचारधारा के कारण सुभाष चन्द्र बोस ने एक अलग रास्ता अख्तियार किया और देश से फरार होकर इंडियन नेशनल आर्मी (INA) के माध्यम से अंग्रेज सरकार पर हमला कर दिया। हालांकि मौसम की मार के कारण यह असफल रहा, मगर उनके कुर्बानी को देश हमेशा याद करता है।

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