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 छेलो शो, निर्देशक पान नलिन की बायोपिक भी है, जिसमें उनके बचपन की कहानी दिखायी गयी है

 
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 पैन नलिन निर्देशित फिल्म ने ऑस्कर अवॉर्ड्स के लिए चुने जाने की रेस में एसएस राजामौली की फिल्म आरआरआर और विवेक अग्निहोत्री की फिल्म द कश्मीर फाइल्स को पीछे छोड़ा था।

इन दोनों फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर बेहतरीन प्रदर्शन किया था। साथ ही, फिल्मों को सोशल मीडिया में भी खूब सराहा गया था। छेलो शो, निर्देशक पान नलिन की बायोपिक भी है, जिसमें उनके बचपन की कहानी दिखायी गयी है, छोटे से कस्बे के बच्चे को कैसे सिनेमा से प्यार हो जाता है। फिल्म 25 नवम्बर से हिंदी और गुजराती भाषाओं में नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम हो रही है।

छेलो शो, जब भारत की आधिकारिक एंट्री बनी थी तो इस फिल्म की तुलना इटैलियन फिल्म सिनेमा पैराडीजो से हुई थी, जिसकी कहानी छेलो शो से मिलती-जुलती है। फिल्म का एक पोस्टर भी सिनेमा पैराडीजो के एक पोस्टर से प्रेरित दिखता है। ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर देख सकते हैं ऑस्कर अवॉर्ड्स समारोह तक पहुंची ये फिल्में और डॉक्यूमेंट्रीज।

यह डॉक्यूमेंट्री फिल्म नेटफ्लिक्स पर ही उपलब्ध है। यह भारत के एक गांव की ऐसी औरतों के बारे में है, जो मशीन से कम कीमत के सेनिटरी पैड्स बनाती हैं। पीरियड्स को भारत के बड़े हिस्से में आज भी एक वर्जित विषय के तौर पर देखा जाता है। इस वर्जना को तोड़ती महिलाएं आर्थिक रूप से भी आत्मनिर्भर हो रही है। इसक फिल् का निर्देशन राक्या जेहताब्ची और मेलिसा बर्टन ने किया था। फिल्म को बेस्ट डॉक्यूमेंट्री शॉर्ट सब्जेक्ट केटेगरी में ऑस्कर पुरस्कार मिला था।

लगान- वंस अपॉन अ टाइम इन इंडिया
आमिर खान की इस फिल्म को ऑस्कर अवॉर्ड्स की बेस्ट फॉरेन लैंग्वेज फिल्म केटेगरी में नॉमिनेशन मिला था। यह फिल्म नेटफ्लिक्स पर उपलब्ध है।

मदर इंडिया
मदर इंडिया भी बेस्ट फॉरेन लैंग्वेज फिल्म केटेगरी में नॉमिनेट किया गया था। हिंदी सिनेमा की इस क्लासिक फिल्म को जियो सिनेमा पर फ्री देखा जा सकता है।

The House That Ananda Built
1968 की इस शॉर्ट डॉक्यूमेंट्री का निर्देशन फाली बिलिमोरिया ने किया था। यह बेस्ट डॉक्यूमेंट्री शॉर्ट केटेगरी में नामांकित हुई थी। नागपुर के ग्रामीण इलाके में एक उड़िया परिवार की कहानी दिखायी गयी है। यह यू-ट्यूब पर उपलब्ध है।

एन काउंटर विद दे फेसेज विधु विनोद चोपड़ा निर्देशित डॉक्यूमेंट्री है। यह एक अनाथालय के कुछ बच्चों के बारे में है। यह बच्चों के नजरिए से बनायी गयी फिल्म है, जिसमे उनके अनुभवों के साथ सामाजिक-आर्थिक हालात को दिखाया गया है।

सलाम बॉम्बे
मीरा नायर की बेहद चर्चित फिल्म सलाम बॉम्बे को 1989 में बेस्ट फॉरेन लैंग्वेज फिल्म केटेगरी में ऑस्कर नॉमिनेशन मिता था।

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