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भारत में चीनी दूतावास के प्रवक्ता ने अमेरिकी विदेश विभाग के अधिकारी डोनाल्ड लू की भारत यात्रा के दौरान चीन पर लगाए गए आरोपों का खंडन किया

 
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 चीन ने दावा किया कि भारत से लगी सीमा पर हालात स्थिर हैं। उसने यह भी कहा कि अमेरिकी अधिकारी माहौल को बिगाड़ना चाहते हैं, जबकि दोनों पक्ष कूटनीतिक और सैन्य चैनलों के माध्यम से सीमा संबंधों मुद्दों पर बातचीत कर रहे हैं। डोनाल्ड डू अमेरिकी विदेश विभाग में दक्षिण और मध्य एशियाई मामलों के सहायक सचिव ब्यूरो हैं।

अमेरिका पर भड़का चीन


भारत में चीनी दूतावास के प्रवक्ता ने अमेरिकी विदेश विभाग के अधिकारी डोनाल्ड लू की भारत यात्रा के दौरान चीन पर लगाए गए आरोपों का खंडन किया। दूतावास ने कहा कि अमेरिकी विदेश विभाग के अधिकारी ने बिना किसी तथ्यात्मक आधार के चीन-भारत सीमा मुद्दे को लेकर चीन पर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि चीनी पक्ष किसी तीसरे देश के दो देशों के द्विपक्षीय मुद्दे पर उंगली उठाने का दृढ़ता से विरोध करता है। चीनी प्रवक्ता ने दावा किया कि वर्तमान चीन-भारत सीमा स्थिति समग्र रूप से स्थिर है।

चीन का दावा- भारत के साथ मिलकर हल करेंगे विवाद


चीनी दूतावास ने बयान में आगे लिखा कि दोनों पक्षों ने कूटनीतिक और सैन्य चैनलों के माध्यम से सीमा संबंधी मुद्दों पर सहज और रचनात्मक संचार बनाए रखा है। दूतावास ने कहा कि दोनों ही देशों ने आपातकालीन प्रतिक्रिया के चरण से सामान्य प्रबंधन और नियंत्रण पर स्विच करने के लिए सीमा की स्थिति को बढ़ावा दिया है। सीमा पर सवाल चीन और भारत के बीच का मामला है। दोनों पक्षों के पास बातचीत और परामर्श के माध्यम से इस मुद्दे को हल करने की इच्छा और क्षमता है। हमें उम्मीद है कि अमेरिका क्षेत्रीय शांति और स्थिरता में योगदान देने वाले और काम कर सकता है।

डोनाल्ड लू ने क्या कहा था


डोनाल्ड लू ने एनडीटीवी के साथ बातचीत में कहा था कि अमेरिका को लगता है कि चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा पर संघर्ष को हल करने के लिए कोई सद्भावनापूर्ण कदम नहीं उठाया है और अपनी आक्रामक चाल जारी रखे हुए है। उन्होंने कहा कि हमने यह नहीं देखा है कि पीआरसी (पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना) ने सीमा विवाद को हल करने के लिए सद्भावनापूर्ण कदम उठाए हैं। इसके विपरीत, हमने भारत की सीमा पर उत्तर पूर्वी राज्यों में आक्रामक चीनी चालें देखी हैं। उन्होंने कहा कि 2020 में जब चीनी सेना ने गालवान घाटी में एक भारतीय सीमा चौकी पर हमला किया, तो अमेरिका ने सबसे पहले चीनी आक्रमण की आलोचना की और भारत को समर्थन देने की पेशकश की।

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