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सचिन बोले, हर पिता चाहता है बेटे से पहचान हो

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अर्जुन तेंदुलकर ने रणजी के डेब्यू मैच ही गोवा से खेलते हुए पहली पारी में 120 रन की पारी खेली कर पिता सचिन तेंदुलकर के रिकॉर्ड की बराबरी की थी। सचिन ने भी 1988 में रणजी की डेब्यू पारी में शतक ठोका था। बेटे के इस कामयाबी पर अब मास्टर ब्लास्टर का बयान आया है। उन्होंने कहा कि मेरे लिए यह गर्व की बात है।

उन्होंने एक इवेंट में अपने डेब्यू शतक और पिता रमेश तेंदुलकर से जुड़ा किस्सा शेयर किया और कहा कि 'मुझे आज भी याद है जब मेरे क्रिकेट के शुरुआती दिन थे, तब मेरे पिता को किसी शख्स ने 'सचिन के पिता' कहकर बुलाया था। तब मेरे पिता के दोस्त ने उनसे पूछा था कि आपको कैसा लग रहा है? तब उन्होंने कहा था कि यह मेरे जीवन का सबसे गौरवान्वित करने वाला पल है। हर एक पिता चाहता है कि वह अपने बच्चे के काम से पहचाना जाए।'

क्रिकेटर का बेटा होने की वजह से होता है दबाव
सचिन ने माना कि एक क्रिकेटर का बेटा होने की वजह से अतिरिक्त दबाव होता है। वे पहले भी अपील कर चुके हैं कि अर्जुन की तुलना उनके साथ न की जाए। उस पर अतिरिक्त दबाव न बनाया जाए। मेरे पैरंट्स ने मुझ पर कभी कोई दबाव नहीं बनाया था। वहीं अब सचिन ने मीडिया से यह भी कहा कि अर्जुन को प्रदर्शन करने दो। उसके प्रदर्शन के बाद ही कुछ कहना सही रहेगा।

शतक से पहले अर्जुन ने की थी सचिन से बात
सचिन ने खुलासा किया कि डेब्यू मैच के पहले दिन मेरी बात हुई थी। मैने उससे शतक के लिए खेलने को कहा था। वह पहले दिन का समाप्त होने तक 4 रन बनाकर नाबाद रहे थे। उसने पूछा था कि टीम के लिए कितना स्कोर ठीक रहेगा। गोवा पहले दिन टॉस हारने के बाद बल्लेबाजी करते हुए 5विकेट के नुकसान पर 210 रन बनाए थे। मैंने उससे कहा कि कम से कम 375 की स्कोर ठीक रहेगा। तब अर्जुन ने कहा कि आप पक्के से कह सकते हैं? तब मैंने कहा कि हां आपको जाकर शतक बनाने की जरूरत है। क्या आपको विश्वास है कि आप जाकर शतक बना सकते हैं?'

अर्जुन ने बनाए 120 रन
अर्जुन ने गोवा के लिए पहली पारी में 207 गेंदों का सामना करते हुए 120 रनों की पारी खेली थी। उन्होंने अपनी पारी में 16 चौके, 2 छक्के लगाए।

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