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विराट व्यक्तित्व के दिव्य प्रेम से एकाकार करता है सहजयोग

जीवन सफल बनायें
 
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             हम सभी के जीवन में कुछ न कुछ परेशानियां लगी रहती हैं । घर की हो ,ऑफिस की  हो , समाज की हो ,या फिर रिश्ते नातों की हो। अब जीवन है तो परेशानी तो रहेगी लेकिन जब हमको इनका हल नही मिलता तो व्यक्ति गलत कदम उठाता है जैसे शराब पीना ,मार पीट करना आत्महत्या करना क्योंकी उसके पास इन सब परेशानी से लड़ने की शक्ति ओर विवेक कुछ क्षण या समय के लिए विलुप्त हो जाता है इस बीच ही खुद या अन्य पर दोषारोपण हो जाता है। अब सोचना यह है की वो हल क्यों नही निकाल पाता ? क्यो की वह संतुलित नही है , उसका विवेक जागृत नही है । उसमें समझ नही है अब कुछ लोग कहते है की पढाई लिखाई बहुत जरूरी है, डिग्री बहुत जरूरी है, इससे समझ आती है। लेकिन ऐसा नही है। परमात्मा ने हम सभी को बुद्धिमान, विवेकवान, बनाकार पृथ्वी पर भेजा है। फर्क है तो सिर्फ इतना की हम जैसे जैसे उम्र में बड़े होते है हम उतने कर्मकांड, ओर सांसारिक और आधुनिक गतिविधियों में खो जाते है अपने आप को और परमात्मा को भूल जाते हैं । अपने दोषों को भूलकर परमात्मा पर दोषारोपण करते हैं ।
  लेकिन ये गलत है हमारी जो परेशानी है, समस्या है उसका कारण भी हम हैं ओर  उसका हल भी हम  है। 


                       इसलिए इन सभी समस्याओं का हल सहजयोग में है। श्रीमाता जी अपने प्रवचन में जानकारी देती हैं कि – "...यह सच है .कि इस सारे ब्रह्मांड की रचना की गई थी। सब कुछ बनाया गया और फिर आप बनाए गए। और वह सब किया जाता है। लेकिन इस शक्ति ने जो सबसे बड़ा काम किया है, वह है सहजयोगियों की रचना करना। यह सबसे बड़ी बात है। जिनके पास ज्ञान है, जिनके पास शुद्ध ज्ञान है और जिनके हृदय में दिव्य प्रेम है, यह कैसा विराट व्यक्तित्व है। बस इसके बारे में सोचें और आपको उस प्यार का इजहार करने के सभी मौके मिलेंगे"...। (श्री निर्मला देवी जी के प्रवचन20.06.1999 से साभार)।


सहजयोग के ध्यान मात्र से हम हर समस्या का हल निकाल सकते है । माँ  हम सबको स्वयं का गुरु बनाती है अर्थात हम सब अपने आप ही अपनी जीवन की सभी समस्याओं का योग से समाधान पा सकते है । जो हमें श्रीमाता जी अपना सहस्रार खोल कर हमें शक्ति प्रदान करती हैं । इसके लिए हमें नियमित रूप से श्री माता जी के सामने ध्यान धारणा पूरे समर्पण के साथ करनी ।
           तब हमारे जीवन की सारी परेशानी माँ हर लेती है।
  विस्तृत जानकारी सहजायोगा डॉट ओआरजी डॉटइन ऑनलाइन पर भी प्राप्त हो जाती है।

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