कोरोना वॉरियर्स और पीड़ित परिवारों को संवेदनशीलता का भाव अपन

कोरोना वॉरियर्स और पीड़ित परिवारों को संवेदनशीलता का भाव अपनाना जरूरी  

 
कोरोना वॉरियर्स और पीड़ित परिवारों को संवेदनशीलता का भाव अपनाना जरूरी
कोरोना महामारी से उत्पन्नन कठिन परिस्थितियों से निपटने संवेदनशीलता एक कारगर हथियार - एड किशन भावनानी

गोंदिया - वैश्विक रूप से कोरोना महामारी की विभिषक्ता ने ऐसा कहर बरपाया हैं कि जनता इस महामारीसे पारिवारिक और अपनों को खोने का दुख लॉकडाउन शासकीय नियमों का पालन, दाह संस्कार में प्रोटोकॉल का पालन, आर्थिक तंगी, इत्यादि अनेक विपरीत परिस्थितियों से घिरी जनता अपना आपा खोने की ओर अग्रसर हो रही है इसी का परिणाम हम टीवी चैनलों के माध्यम से देख रहे हैं कि अनेक देशों में जनता लॉकडाउन हटाने और अन्य समस्याओं पर रोड पर उतर आई है।...बात अगर हम भारत की करें तो उपरोक्त परिस्थितियों के अतिरिक्त भारत में वर्तमान समय में ऑक्सीजन की कमी, वैक्सीनेशन की धीमी गति, मरीजों की संख्या में बेतहाशा वृद्धि,मेडिकल संसाधनों और मेडिकल मानवीय संसाधनों के कम पढ़ने, जैसी अनेक अतिरिक्त समस्याएं भी उत्पन्न हुई है जिसके निवारण के लिए पूरा विश्व भारत की मदद के लिए खड़ा हुआ है और अत्यंत तात्कालिक रूप से इन मेडिकल संसाधनों की कमियों को आपूर्ति कर संकट की घड़ी से उबारने की पूरी कोशिश जी जान से की जा रही है और रोज मेडिकल संसाधनों से भरे विमान भारतीय धरती पर उतर रहे हैं। उधर बुधवार दिनांक 4 मई 2021 को भारत और ब्रिटेन के प्रधानमंत्रियों की वर्चुअल समिट में 2030 तक व्यापार दोगुना करने, कोविड-19 पर मदद बढ़ाने,डिफेंस क्षेत्र में सहयोग सहित कई मुद्दों पर सहमति हस्ताक्षर और रोडमैप तैयार किए गए। भारतीय पीएम वैसे भी कई दिनों से कोरोना संकट पर अलग-अलग क्षेत्रों, समूह, शासकीय प्रशासकीय स्तर पर वर्चुअल बैठक कर समीक्षा कर निर्णय दे रहे हैं...बात अगर हम भारत में कोरोना महामारी के अभूतपूर्व संकट की करें तो इसकी कोरोना चैन को तोड़ने में संवेदनशीलता का भी एक अहम व महत्वपूर्ण रोल है। विपत्ति की इस घड़ी में संयम, सहनशीलता रूपी यह अस्त्र बहुत ही कारगर सिद्ध होगा। क्योंकि हम प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से रोज कोरोना वॉरियर्स और कोविड 19 पीड़ित मरीजों के रिश्तेदारों, जनता का विवाद और मारपीट की घटनाएं देखते सुनते वह पढ़ते हैं क्योंकि पीड़ितों के पारिवारिक सदस्य रिश्तेदार की मृत्यु पर कई देशों में इसका जिम्मेदार मेडिकल कोरोनावरियर्स की लापरवाही को मानते हैं और यहीं से दोनों पक्षों में खटास मनमुटाव व गुस्से का बीज पड़ता है और स्थिति मारामारी तक की लाइव हमने टीवी चैनलों पर देखे हैं।...बात अगर कोरोनावरियर्स की करते हैं तो पिछले वर्ष से लेकर इस घातक बीमारी से जंग में सबसे अधिक महत्वपूर्ण सेवा कर रहे हैं दोगुने से भी अधिक सेवा टाइम दे रहे हैं, रिस्क उठा रहे हैं, कई डॉक्टरों की मृत्यु भी हुई है और स्वभाविक ही है कि मानसिक तनाव से कुछ स्तर का पर स्वभाव, व्यवहार कार्यक्षमता में कमी हो सकती है जिस पर उन्हें नियंत्रण रख संवेदनशीलता, सहनशीलता, संयम रूपी अस्त्र का प्रयोग कर ऐसे माहौल में मरीजों उनके पारिवारिक सदस्यों के दुखों को समझ स्थिति नियंत्रण में करना होगा। उधर यूपी के सीएम साहब ने 4 मई 2021 को टीम 9 की समीक्षा बैठक में निर्णय लिया सभी जिलों में सेक्टर मजिस्ट्रेट प्रणाली लागू की गई है और कोविड आपातकाल में सीएमओ को सख्त निर्देश दिए गए हैं। वहीं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया अनुसार बिहार गृह विभाग ने भी कोविड -19 अस्पतालों की सुरक्षा चिकित्सकों के साथ दुर्व्यवहार, तोड़फोड़ पर सख़्ती के लिए मजिस्ट्रेट के साथ पुलिस बल तैनात किए जाएंगे।...बात अगर हम कोविड 19 पीड़ित मरीजों और उनके परिवार वालों, रिश्तेदारों और जनता की करें तो इस भयानक महामारी का जबरदस्त आघात, लॉकडाउन की मार, आर्थिक तंगी, ऑक्सीजन बेड, वेंटिलेटर इत्यादि संसाधनों की कमी और अन्य मेडिकल समस्याओं, मेडिकल कोरोना वॉरियर्स के व्यवहार से दुखी अपनी सहनशीलता, संवेदनशीलता संयम को खो देते हैं और बात मारामारी, तोड़फोड़ तक पहुंच जाती है क्योंकि उन्हें मरीजों के संबंध में कुछ भी जानकारी, व्यवस्था, दवाई ऑक्सीजन, की जानकारी नहीं देने का आरोप मेडिकल कोरोना वायरस पर लगाते हैं, इसी को ध्यान में रखते हुए बिहार सरकार ने आदेश दिया है कि मरीजों के परिजनों को प्रतीक्षा करने के अस्थाई व्यवस्था का निर्माण किया जाए और परिजनों को मरीजों के स्वास्थ्य के संबंध में समय-समय पर अद्यतन सूचना उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए।मेरा निजी मानना है कि ऐसी व्यवस्था हर राज्य द्वारा अत्यंत तात्कालिक रूप से की जानी चाहिए जिन राज्यों ने ऐसी व्यवस्था की है वह सराहनीय है।...बात अगर अमानवीयता की करें तो, मीडिया में ऐसे कई केस बताएं और दिखाया जाए रहे हैं जहां पीड़ित की मृत्यु पर अंतिम क्रिया में भी पारिवारिक सदस्य करीब नहीं आए, एक पुत्र ने अपने कोरोना से पीड़ित मां को कमरे में कई दिनों से कैद कर रखा था जिसे बाद में पुलिस और रिश्तेदारों ने मिलकर मुक्त कराया। जम्मू में सोमवार को 2 माह के बच्चे को कोरो ना होने पर मां बाप अस्पताल में छोड़कर चले गए और उसकी मौत हो गई। ऐसी अमानवीय घटना देखने सुनने के को मिल रही है जहां उपरोक्त अत्यंत तात्कालिक संवेदनशीलता की जरूरत है।...बात अगर इस प्रकार के अस्पतालों में मेडिकल कोरोना वॉरियर्स और मरीज के परिजनों की मारपीट, विवाद अस्पताल में तोड़फोड़ की करें तो यह कानूनी रूप से किसी भी प्रकार से उचित नहीं ठहराया जा सकता। परंतु दोनों पक्षों में यह विवाद बिल्कुल ना हो इसके लिए ही अत्यंत तात्कालिक रूप से संवेदनशीलता को अस्त्र के रूप में दोनों पक्षों ने अपनाना होगा। क्योंकि यह संकट से भरी स्थिति ही ऐसी है कि अगर दिल और मार्मिक रूपसे देखा जाए और समयकी नजाकत को देखा जाए तो गलती दोनों पक्षों की नहीं है। बस स्थिति ऐसी उत्पन्न हो जाती है कि आदमी आपा खो देते हैं और जो किसी भी प्रकार से उचित नहीं है। उसके नियमों, विनियम प्रोटोकॉल कानूनों का पालन सबके लिए अनिवार्य है। अतः उपरोक्त पूरी परिचर्चा का विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि यदि दोनों पक्षों में संवेदनशीलता सहनशीलता, संयमता का भाव इस संकट की घड़ी में अपनाया जाए तो विपरीत स्थिति पर नियंत्रण पाया जा सकता है।

-संकलनकर्ता लेखक-कर विशेषज्ञ एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

From around the web