लैंगिक असंतुलन को समाप्त करने का संकल्प लेते हैं।

लैंगिक असंतुलन को समाप्त करने का संकल्प लेते हैं।

 
लैंगिक असंतुलन को समाप्त करने का संकल्प लेते हैं।
हम  विश्व स्तर पर 11 फरवरी को विज्ञान में महिलाओं एवं बालिकाओं को प्रोत्साहित करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के रूप में मनाते है, यह दिवस विज्ञान और प्रौद्योगिकी में महिलाओं एवं बालिकाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को चिन्हित करने के लिए मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा दिसंबर 2015 में, 11 फरवरी को विज्ञान में महिलाओं एवं बालिकाओं का अंतर्राष्ट्रीय दिवस मनाने का प्रस्ताव अपनाया गया था। याद रहे आज 21 वीं सदी की चुनौतियों का सामना करने के लिए, हमें अपनी पूरी क्षमता का दोहन करने की आवश्यकता है, इसके लिए लैंगिक रूढ़ियों को खत्म करने की आवश्यकता है। इसका अर्थ है की महिला वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के कैरियर का समर्थन करना होगा ,वैसे ये दिवस पहली बार 2016 में ही  मनाया  गया था, इस दिन को मनाएं जाने के उद्देश्य  विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित  के क्षेत्र में महिलाओं एवं बालिकाओं की समान सहभागिता और भागीदारी सुनिश्चित करना है,देश तेजी के साथ विकास के पथ पर तभी बढेगा जब देश की महिलाये , लड़कियां शिक्षित होंगी विज्ञान के क्षेत्र में भी ,विज्ञान में महिलाओं और लड़कियों के इस अंतर्राष्ट्रीय दिवस पर, आइए आज हम विज्ञान में लैंगिक असंतुलन को समाप्त करने का संकल्प लें।विज्ञान के क्षेत्र में लैंगिक अंतराल के पीछे मुख्य कारण अक्सर  यह पाया है कि  विभिन्न अध्ययनों में  बालिकाएँ स्कूल में गणित और विज्ञान-उन्मुख विषयों में उत्कृष्टता प्राप्त करती हैं, लेकिन आत्मविश्वास की कमी के कारण इन विषयों को उच्च शिक्षा के स्तर पर नहीं अपनाती हैं, इसका असल वजह तो बचपन में ही हम देखते है की घर से ही भेदभाव लड़को व लड़कियों में होने लगता है ,हम सभी ने देखा है की अगर किसी परिवार में दो बच्चे जुड़े जन्म लेते है,तो देखने में आता है की अगर एक लड़की हो तो उसको अक्सर गुड़िया ,और खाना बनाने वाले खेलने का खिलौने लाकर दिया जाता है,वही लड़को को बहादुरी वाले बंदूक और बाइक यही से भेदभाव शुरू होता ,जो धीरे धीरे लड़कियों के दिमाग में भर दिया जाता है ,खैर आज लड़कियां जहाज से लेकर मिसाइल तक उड़ा रही है , जबकि वही इसीलिए तो बालकों में यह पहले से ही आत्मविश्वास होता ​​है कि वे बेहतर कर सकते हैं, यही आत्मविश्वास उन्हें उच्च शिक्षा के स्तर पर गणित और विज्ञान-उन्मुख विषय अपनाने के लिये प्रेरित करता है, नीति आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है कि विज्ञान उन्मुख विषयों में महिलाओं के प्रवेश की समस्या प्रत्येक क्षेत्र में एक समान नहीं है। शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में स्कूल स्तर पर बालिकाओं के बीच इंजीनियरिंग या भौतिक विज्ञान या रसायन विज्ञान जैसे विषयों को लोकप्रिय बनाने के लिये हस्तक्षेप किया जा सकता है।बालिकाओं के बीच विज्ञान उन्मुख विषयों के प्रति आत्मविश्वास को बढ़ने के लिये गैर सरकारी संगठनों की सहायता प्राप्त की जा सकती है, जिससे उनकी समय-समय पर काउंसलिंग की जा सकती है।

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