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केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का दो दिवसीय एमपी दौरा, जमीन से लेकर आसमान तक सख्त सुरक्षा व्यवस्था

ग्वालियर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 24 दिसंबर को मध्य प्रदेश के ग्वालियर पहुंच सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, शाह यहां रात्रि विश्राम भी करेंगे और उनके साथ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी मौजूद रहेंगे। इस यात्रा को लेकर सुरक्षा व्यवस्था को बेहद सख्त कर दिया गया है। जिस वीआईपी होटल में गृह मंत्री ठहरेंगे, …
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ग्वालियर 
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 24 दिसंबर को मध्य प्रदेश के ग्वालियर पहुंच सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, शाह यहां रात्रि विश्राम भी करेंगे और उनके साथ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी मौजूद रहेंगे। इस यात्रा को लेकर सुरक्षा व्यवस्था को बेहद सख्त कर दिया गया है। जिस वीआईपी होटल में गृह मंत्री ठहरेंगे, उसे पुलिस ने पहले ही घेरे में ले लिया है। शुक्रवार को पुलिस अधिकारियों ने होटल का दौरा कर सुरक्षा का पूरा खाका तैयार किया।

राजनीतिक हलचल बढ़ी, कांग्रेस की नजर भी बैठक पर
अमित शाह के ग्वालियर में रात्रि विश्राम करने की खबर से राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई है। भाजपा नेताओं का मानना है कि गृह मंत्री मुख्यमंत्री के साथ ग्वालियर-चंबल अंचल के प्रमुख भाजपा नेताओं और दिग्गजों के साथ बंद कमरे में महत्वपूर्ण बैठक कर सकते हैं। चंबल क्षेत्र में पार्टी की रणनीति, संगठनात्मक मजबूती और आगामी राजनीतिक समीकरणों पर चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है।

अहम मानी जा रही बैठक
यह बैठक इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि चंबल अंचल भाजपा के लिए हमेशा से महत्वपूर्ण रहा है।
अगले दिन यानी 25 दिसंबर को अमित शाह ग्वालियर के मेला मैदान में आयोजित एक बड़े कार्यक्रम में शिरकत करेंगे। कार्यक्रम की तैयारियां जोरों पर हैं। मेला मैदान में तीन विशाल डोम लगाए जा रहे हैं, जिनमें करीब 30 हजार लोगों के बैठने की व्यवस्था की गई है।

नो मैन्स जोन घोषित
सुरक्षा के लिहाज से पूरे आयोजन स्थल को नो मैन्स जोन घोषित किया जाएगा। डोम के अंदर-बाहर पुलिस का कड़ा पहरा रहेगा। ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों से हर गतिविधि पर नजर रखी जाएगी। कार्यक्रम स्थल तक आने वाले रास्तों पर बैरिकेड्स लगाए जाएंगे, ताकि किसी तरह की असुरक्षा की गुंजाइश न रहे।
 
अमित शाह की यह यात्रा सिर्फ एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं लग रही। रात्रि विश्राम और संभावित बैठकों ने इसे राजनीतिक दृष्टि से और भी महत्वपूर्ण बना दिया है। भाजपा के स्थानीय नेता इसे पार्टी के लिए सकारात्मक संदेश के रूप में देख रहे हैं, जबकि विपक्षी खेमे में भी इस पर नजर टिकी हुई है। कुल मिलाकर, ग्वालियर इस क्रिसमस पर राजनीतिक गहमागहमी का केंद्र बनने जा रहा है।

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