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कर्जा लेकर पी रहे हैं घी,कह रहे हैं, देश-प्रदेश आत्मनिर्भर हो रहा है

 
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भोपाल i प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष के.के.मिश्रा ने केंद्र और मप्र सरकार पर करोड़ों के कर्ज में डूबे होने का प्रामाणिक आरोप लगाते हुए कहा कि दोनों ही सरकारें कर्ज लेकर घी पी रही हैं व विभिन्न प्रचार माध्यमों से कथित तौर पर आत्मनिर्भर होने को झूठी वाहवाहियां बटोर आम नागरिकों को झूठ परोस रही हैं। असलियत में प्रामाणिक आंकड़ों की  हकीकत कुछ और बयां कर रही है।
जारी अपने बयान में मिश्रा ने कहा कि केंद्र में पूर्ववर्ती मनमोहनसिंह सरकार के दौरान  31 मार्च, 2015 तक  देश पर  32 लाख 62 हजार 357.55 करोड़ का कर्ज था, जो नरेंद्र मोदी सरकार के 7 वर्षीय कार्यकाल में दोगुना से भी अधिक बढकर  31 मार्च, 22 तक 136 लाख करोड़ हो गया है ! यही नहीं इन्हीं 7 सालों में यानी 1 अप्रैल, 2015 से 31 मार्च,2021 तक मोदी सरकार ने बैंकों के  11 लाख 19,482 करोड़ रु. के कर्ज माफ कर दिए हैं!  मनमोहनसिंह सरकार ने  2004 से 2014 तक मात्र 2.22  लाख करोड़ के कर्ज माफ किए थे, यानि मोदी सरकार ने बैंक लोन 5 गुना ज्यादा माफ किए ⁉️ यह आंकड़े आरटीआई से प्राप्त हुए हैं जिसकी जानकारी भी आरबीआई द्वारा दी गई है!


मिश्रा ने कहा कि यह कर्ज ज्यादातर उद्योगपतियों से संबद्ध हैं जो एनपीए हुए हैं। उन्होंने कहा कि कई लाख करोड़ों रु.के कर्ज में डूबी मोदी सरकार एक ओर गरीब जनता की गाढ़ी कमाई    बड़े उद्योगपतियों की कर्ज माफी पर लूटा रही है,वहीं आम गरीब-मध्यमवर्गीय जनता को महंगा पेट्रोल-डीजल,रसोई गैस की सब्सिडी बंद कर यहां तक कि अब आटा,दूध,दही जैसे आवश्यक पदार्थों पर भी जीएसटी लगा कर लूट रही है,यह कैसा न्याय है ? मिश्रा ने यहां तक कहा कि जब देश पर आर्थिक संकट मंडरा रहा है तो मात्र अपना चेहरा चमकाने के लिए 911  करोड़ के विज्ञापन, 8,400 करोड़ का नया विमान खरीदने, 20 हजार करोड़ खर्च कर सेंट्रल विस्ता प्रोजेक्ट जिसमें नया प्रधानमंत्री आवास,संसद भवन व अन्य निर्माण की जरूरत क्यों ? प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को देश को यह भी बताना चाहिए कि "पीएम रिलीफ फंड" में अब तक कितनी राशि जमा हुई और इसकी जानकारी  आरटीआई में नहीं दिए जाने के पीछे क्या अवधारणा है ?


अपने बयान के अंत में मप्र सरकार को भी घेरते हुए कहा कि पूर्ववर्ती दिग्विजय सरकार के दौरान राज्य पर 33  हजार करोड़ रु.कर्ज था,जो अब बढ़कर 3.50 लाख करोड़ हो गया है। शिवराज सरकार औसत 3000 करोड़ रु.प्रतिमाह कर्ज  ले रही है और केंद्र-प्रदेश दोनों ही सरकारें कर्ज लेकर घी पीने के बाद "आत्मनिर्भर"   निर्भर होने का झूठ परोसकर  आत्ममुग्ध हो रही हैं! लिहाजा, सामयिक होगा कि  दोनों ही सरकारें अपनी-अपनी आर्थिक स्थितियों पर श्वेतपत्र जारी करें।

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